Samachar Patra Ka Mahatva Essay

समाचार-पत्र : ज्ञान का सशक्त साधन

Samachar Patra – Gyan ka Sashakt Sadhan

निबंध नंबर :- 01 

     समाचार-पत्र की आवश्यकता – मनुष्य स्वभाव से जिज्ञासु है | वह जिस समाज में रहता है, उसकी पूरी जानकारी चाहता है | इस बहाने वह शेष दुनिया से जुड़ता है | इसी प्रवृति के कारण ही समाचार-पत्र का उदय हुआ |

इतिहास – भारत में पहला समाचार-पत्र ‘इंडिया गजट’ नाम से प्रकाशित हुआ | हिंदी का सवर्प्रथम समाचार-पत्र ‘उदंत मार्तड’ कोलकाता से प्रकाशित हुआ | आज हिंदी-अंग्रेजी के सैकड़ों समाचार-पत्र निकल रहे हैं | इनमें से प्रमुख हैं – हिंदुस्तान, हिंदुस्तान टाइम्स, ट्रिब्यून, स्टेट्समैन, टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक जागरण, जनसता, पंजाब केसरी, अमृत बाज़ार पत्रिका, पायोनियर, इंडियन एक्सप्रेस आदि |

विश्व-भर से जोड़ने का साधन – समाचार-पत्र मनुष्य को विश्व-भर से जोड़ता है | प्रात: होते ही सारे संसार महत्वपूर्ण जानकारियाँ समाचार-पत्र द्वारा उपलब्ध हो जाती हैं | इसलिए जेम्स एलिस ने कहा था – “समाचार-पत्र संसार के दर्पण हैं |”

लोकतंत्र का प्रहरी – समाचार-पत्र लोकतंत्र का सजग प्रहरी है | लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि जनता सब कुछ जाते और अपनी इच्छा-अनिच्छा को प्रकट करे | नपोलियन खा करता था – “ मैं लाखों संगीनों की अपेक्षा तीन विरोधी समाचार-पत्रों से अधिक डरता हूँ |”

जनमत बनाने का साधन – ‘समाचार-पत्र साधारण जनता के शिक्षक हैं |’ समाचार-पत्रों के संपादक, संवाददाता या अन्य अधिकारी जिस समाचार को जिस ढंग से देना चाहें, दे सकते हैं | आम जनता समाचार-पत्रों से सीधे प्रभावित होती है | विभिन्न समाज-सुधारक, चिंतक, विचारक, आंदोलन-कर्ता, क्रांतिकारी अपने विचारों को छापकर जनता को प्रभावित कर सकते हैं |

ज्ञान-वृद्धि का साधन – आजकल समाचार-पत्र पाठकों की ज्ञान-वृद्धि भी करते हैं | विशेष रूप रविवारीय पुष्ठों में छपी जानकारियाँ, नित्य नए अविष्कार, नए साधन, नए पाठ्यक्रमों की जानकारी, अदभुत संसार की अदभुत जानकारियाँ पाठकों का ज्ञान बढ़ाती हैं | रोगों की जानकारी, उनके इलाज के उपाय भी समाचार-पत्र में छापे जाते हैं |

मनोरंजन का साधन – आजकल समाचार-पत्र पाठकों के लिए मनोरंजन की रंग-बिरंगी सामग्री लेकर उपस्थित होते हैं | खेल-संसार, फिल्मी संसार, चुटकले, कहानियाँ, पहेलियाँ, रंग-भरो प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चे, किशोर और तरुण, भी समाचार-पत्रों पर जान छिड़कते हैं |

व्यापर के लाभ – समाचार-पत्रों से सर्वाधिक लाभ व्यापारियों, उद्योगितियों और फैक्ट्रियों को होता है | प्रचार और विज्ञापन के द्वारा इनका माल रातोंरात देशव्यापी बन जाता है | इसके माध्यम से आप अपनी संपति खरीद-बेच सकते हैं, सोना-चाँदी और शेयरों के दैनिक भाव जान सकते हैं | सचमुच समाचार-पत्र सांसारिक सिद्धियों का भंडार है | यस एसा शब्द-संसार है जिसमें पूरा संसार बसा है

निबंध नंबर :- 02

समाचार-पत्र

Samachar Patra

प्रस्तावना- आजकल समाचार-पत्र अनेक रूपों में दिखाई देते हैं। इनके रूप हैं-दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, पाक्षिक आदि। परन्तु इन सबमें दैनिक समाचार-पत्र ही सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। समाचार-पत्र निम्न नामांे से प्रकाशित होते हैं,- दैनिक जागरण, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दि टाइम्स आॅफ इंडिया आदि।

इनमें से कुछ हिन्दी के अलावा अंग्रेजी भाषा में भी प्रकाशित होते हैं। समाचार-पत्रों के द्वारा जनता की कम-से-कम समय में ज्ञान-वृद्धि होती है।

समाचार-पत्रों का उद्देश्य जनता को विभिन्न प्रकार की जानकारी देना तथा (पाठकों को) मनोरंजन (लेख कहानियां देना होता है।) इनके माध्यम से सिनेमा प्रेमियों को सिनेमा की खेल प्रेमियों को खेल की तथा नारियों का नारी सम्बन्धी विषयों की जानकारी मिलती है।

समाचार को विभिन्न स्थानों से एकत्रित करने वाले संवाददाता इन्हें समाचार-पत्र के कार्यालय तक पहंुचाने के लिए टेलीफोन, तार व पिंट्रर आदि का प्रयोग करते हैं। विभिन्न रोचक जानकारियों को जनता तक पहंुचाने के लिए संवाददाता कठोर परिश्रम करते हैं।
समाचार-पत्र ऐसी गागर के समान है जिसमें ज्ञान व मनोरंजन का सागर भरा हुआ होता है। यह जनता को विश्व की महत्वपूर्ण घटनाओं, तथ्यों तथा मनोरंजनपूर्ण तथ्यों से अवगत कराता है।

समाचार-पत्र वर्तमान समाज में अत्यधिक उपयोगी- जिन्हें समाचार-पत्र पढ़ने का शौक हो जाता है, वे प्रातः उठते ही दैनिक क्रिया से निवृत होते ही समाचार-पत्र लेकर पढ़ने बैठ जाते हैं। एक ही सिटिंग में देश-विदेश, दुनिया-जहान की खबरों को पढ़कर ही किसी अन्य कार्य की ओर ध्यान देते हैं। समाचार-पत्र हमें विश्व में पल-पल घटने वाली घटना की जहां जानकारी देता है, वहीं ज्ञान-विज्ञान के ऐसे हीरे-मोती हमारे सामने बिखेरता है कि हम उन्हें चुन-चुनकर अपने सामान्य ज्ञान के कोश में सजाते चले जाते हैं।

उपसंहार- संचार क्रांति के बढ़ते कदम के साथ आज समाचार-पत्र के लिए समाचार जुटाना बहुत सरल हो गया है। इलैक्ट्रानिक प्रिन्ट मीडिया माध्यम होने से, ताजी-तरीन खबरों को समाचार-पत्र शीघ्रता से हम तक पहुंचा देता है।

June 27, 2016evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 CommentHindi Essay, Hindi essays

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समाचार-पत्र या अखबार

समाचार-पत्र का हमारे दैनिक जीवन में अत्यन्त महत्व है। विश्व का शायद ही ऐसा कोई प्रदेश हो, जहाँ के लोग समाचार पत्र का उपयोग न करते हों। सुबह होते ही लोगों को समाचार पत्र की सुध हो जाती है। इससे लोगों को विश्व की तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां कुछ ही क्षणों में प्राप्त हो जाती है।

समाचार-पत्र का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। प्रथम ज्ञात समाचार पत्र 59 ई0 पू0 का ’’द रोमन एक्टा डिउरना’’ है। भारत में समाचार-पत्र की शुरूआत श्बंगाल गजटश् नामक पत्रिका के साथ हुई। हिन्दी में प्रथम दैनिक समाचार-पत्र ‘‘उदंत मार्तण्ड’’ का प्रकाशन 30 मई 1826 ई0 को हुआ। समाचार पत्र का वर्गीकरण तीन रूपों में किया जा सकता है। प्रथम, दैनिक समाचार-पत्र हैं, जो प्रतिदिन प्रकाशित होते हैं और प्रतिदिन होने वाली घटनाओं को प्रस्तुत करते हैं। द्वितीय, साप्ताहिक समाचार-पत्र हैं, जो पूरे सप्ताह में एक बार ही प्रकाशित होते हैं। ऐसे समाचार-पत्रों में पूरे सप्ताह भर के खबरों को संकलित कर प्रस्तुत किया जाता है। तृतीय, मासिक समाचार-पत्र हैं, जिससे हमें पूरे महीने होने वाली घटनाओं का पुनराभास हो जाता है। आज विश्व भर में हजारों दैनिक, साप्ताहिक और मासिक समाचार-पत्र उपलब्ध हैं, जो अनेक भाषाओं में छापे जाते हैं। भारत के प्रमुख समाचार पत्रों में अमर उजाला, दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, आदि ;हिन्दीद्ध तथा द टाइम्स आॅफ इंडिया, द हिन्दु, द इंडियन एक्सप्रेस, डेक्कन हेराल्ड, आदि ;अंगे्रजीद्ध हैं।

समाचार-पत्र को समाज का दर्पण कहा जाता है, क्योंकि यह उन समस्त घटनाओं को जो प्रतिदिन घटती हैं यथासंभव वैसे ही हमारे सन्मुख प्रस्तुत करता है। इनमें देश-विदेश की घटनाओं, रोजगार, प्रचार, मनोरंजन, उदघोषणाओं आदि की लिखित जानकारियाॅं होती हैं। कुछ ही पलों में हम इनके अध्ययन से अपने आस-पास की खबरों के साथ-साथ, देश-विदेश के अनेक प्रांतों में क्या हो रहा है घर बैठे जान जाते हैं। हम इसके माध्यम से अपने संदेश, उदघोषणाएॅं, शिकायत आदि प्रचारित कर सरकार सहित आम जनता को सूचित कर सकते हैं। संपादकों तथा पत्रकारों के माध्यम से समाज में होने वाले आपराधिक कृत्यों, अपराधों आदि को रोकने में तथा जन-जागरण में मदद मिलती है। यह नौजवानों को नई दिशा तो प्रदान करता ही है, लेकिन साथ ही बच्चों की अभिरूचि पढ़ाई में लाता है। अनेक समाचार-पत्रों में बच्चों के लिए विशेष काॅलम होते हैं।

समाचार-पत्र का मूल्य पुस्तकों की तुलना में अत्यन्त कम होता है। अतः समाचार के हर तबके के लोगों तक इसकी पहुॅंच है। इनके नियमित अध्ययन से हमें पुस्तकों से कहीं अधिक रोचक और ज्ञानवर्द्धक जानकारियाॅं प्राप्त हो जाती हैं। हालाॅंकि समाचार-पत्रों में अनेक गैर-जरूरी सूचनाएॅं छाप दी जाती हैं, जिससे लोग दिग्भ्रमित हो जाते हैं। अतः ऐसे खबरों तथा सूचनाओं के प्रकाशन से पूर्व संपादक को इनके दुष्प्रभावों का आॅंकलन कर लेना चाहिए। समाचार-पत्र केवल व्यवसाय का साधन नहीं है, यह तो समाज को उसकी वास्तिविक छवि दिखाता है। आज के पत्रकार तथा संपादक व्यावसायिकता के जमाने में खबरों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने लगे हैं। अतः इनके प्रकाशक को खबरों की विश्वसनियता और महत्वत्ता का आॅंकलन जरूर करना चाहिए, तभी यह समाज के लिए वरदान साबित होगी।
शब्द संख्या: 346

March 31, 2016evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 CommentHindi Essay

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